पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल के बीच आज वार्ता होनेवाली है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस्लामाबाद में ईरान के प्रतिनिधियों के साथ वार्ता की अगुवाई करेंगे। हालांकि इस्लामाबाद रवाना होने से पहले भी वेंस की ओर से सख्त बयान आए। वहीं डोनाल्ड ट्रंप के भी बयान धमकी से भरे थे। उन्होंने कहा कि अगर ईरान समझौता नहीं करता है तो उसे बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि डोनाल्ड्र ट्रंप 'क्विक डील' या यूं कहें कि जल्द हासिल होनेवाली बड़ी उपलब्धि की तलाश में रहेंगे ताकि वे इसे अपनी बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पेश कर सकें।
Related Stories
ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य
अलजजीरा के मुताबिक कुवैत और ईराक में अमेरिका के पूर्व राजदूत डगलस सिलीमन ने डोनाल्ड ट्रंप की आगामी ईरान नीति को लेकर विशेषज्ञों ने बड़े संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन का मुख्य उद्देश्य ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को समाप्त करना और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बढ़ते दबाव को कम करना होगा। सिलीमन के अनुसार, ट्रंप किसी ऐसे समझौते या उपलब्धि की तलाश में रहेंगे जिसे वे जल्द ही अपनी बड़ी जीत के रूप में पेश कर सकें।
तीन अहम बिंदु
सिलिमन ने बताया कि ट्रंप की इस 'जीत' के दायरे में तीन मुख्य बिंदु हो सकते हैं: पहला है अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम को ईरान से बाहर निकालना, दूसरा ईरान को यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को पूरी तरह से बंद करवाना और स्ट्रोट ऑफ होर्मुज को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह खुलवाना।
होर्मुज को बंद करना ईरान की रणनीतिक जीत
पूर्व राजदूत सिलिमन ने इस बात उल्लेख किया कि इस संघर्ष में ईरान की सबसे बड़ी रणनीतिक जीत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के माध्यम से होने वाले ट्रैफिक बाधित करना रही है। क्योंकि विश्व अर्थव्यवस्था के लिए इस तरह का कदम उठाना एक बहुत बड़ा जोखिम है। यह समुद्री मार्ग ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम है।
ईरान को कुछ रियायतें दे सकता है अमेरिका
विशेषज्ञों की मानें तो होर्मुज को फिर से खुलवाने और यातायात नॉर्मल करने के लिए ट्रंप प्रशासन ईरान को कुछ बड़ी रियायतें देने पर विचार कर सकता है। हालांकि सिलीमन का मानना है कि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान अन्य किन मुद्दों पर बातचीत की मेज पर आने को तैयार होता है। वहीं ट्रंप का ध्यान युद्ध को खींचने के बजाय उसे डील के जरिए खत्म करने पर रहेगा, ताकि अमेरिकी हितों और वैश्विक बाजार को स्थिरता मिल सके।